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Rajat Sharma's Blog: झारखंड: परीक्षाओं में धांधलियों की शर्मनाक कहानी

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 05, 2026 07:57 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 07:57 pm IST

झारखंड में JPSC, SSC, CGL की परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ जो छात्र 12 दिन से धरने पर बैठे हैं, उनके हाथों में अभय तिवारी का पोस्टर है। पोस्टर्स में अभय तिवारी को परीक्षाओं में धांधली का मास्टरमाइंड बताया गया है।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

झारखंड की सरकारी परीक्षाओं में किस कदर धांधलियां हुई है, उन्हें पढ़ कर आप चौक जाएंगे। जो एजेंसी ब्लैक लिस्टेड थी, जिसके मालिक को सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली  के लिए गिरफ्तार किया गया था, उसी एजेंसी को सारी सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं का ठेका दे दिया गया।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 2014 के बाद जितनी भी परीक्षाएं हुईं, उन सबमें गड़बड़ी के आरोप लगे लेकिन कंपनी का ठेका रद्द नहीं किया गया। हैरानी की बात तो ये है कि कंपनी के मार्केटिंग मैनजर ने तेरह साल में बारह सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरे, सारी परीक्षाओं में टॉपर्स की लिस्ट में रहा। वो नौसेना अफसर, दारोगा, कॉन्स्टेबल और शिक्षक से लेकर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का क्लर्क, सब बन गया।

ऐसे होनहार शख्स का नाम है, अभय तिवारी। झारखंड में JPSC, SSC, CGL की परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ जो छात्र 12 दिन से धरने पर बैठे हैं, उनके हाथों में अभय तिवारी का पोस्टर है।  पोस्टर्स में अभय तिवारी को परीक्षाओं में धांधली का मास्टरमाइंड बताया गया है।

अभय तिवारी अलग-अलग नाम से एक ही वक्त में दो नौकरी कर रहा था। वो गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई अफसर था। वहां अभय तिवारी के नाम से नौकरी कर रहा था। उसकी दूसरी नौकरी TDPL कंपनी में थी। वहां वह मनोज तिवारी के नाम से काम कर रहा था। उसे मार्केटिंग मैनेजर की पोस्ट दी गई। TDPL कंपनी में अभय तिवारी ने जो कारनामे किए हैं, उन्हें सुनकर आप चौंक जाएंगे।

2013 के बाद 13 साल में झारखंड में सरकारी नौकरी की जितनी परीक्षाएं हुई, सारी परीक्षाओं में अभय तिवारी पास हो गया। ज्यादातर भर्ती परीक्षाओं में उसने टॉप किया। उसे पहली या दूसरी रैंक मिली।

अभय तिवारी ने ऐसा फॉर्मूला सैट किया कि उसके भाई और भाभी को भी सरकारी नौकरी मिल गई। उसने अपनी साली को भी सरकारी नौकरी दिला दी। कोई बैकडोर से नहीं आया, सब परीक्षाओं में पास हुए और नियुक्ति पत्र हासिल किया।

अब धरने पर बैठे छात्र पूछ रहे हैं कि सरकार जांच करा ले, अभय तिवारी वाला फॉर्मूला पता लगा ले और वो फॉर्मूला झारखंड के सभी नौजवानों को बता दे, सब का कल्याण हो जाएगा। अभय तिवारी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। CID  मामले की जांच कर रही है। अब तक 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

सीआईडी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद समेत 18 जिलों में छापे मारे, जिन कोचिंग सेंटर्स के साथ अभय तिवारी की सेटिंग थी, जो शिक्षक उसके गिरोह में थे, उनके ठिकानों की भी तलाशी ली गई।

छापे में उम्मीदवारों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और मार्कशीट्स मिली। अभय तिवारी पिछले 13 साल से पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का धंधा कर रहा था। पिछले 13 साल में उसने खुद 12 परीक्षाएं पास की, उसने जो जो फॉर्म भरा सबमें सेलेक्ट हो गया।

2013 में भारतीय नौसेना में SSR परीक्षा के लिए फॉर्म भरा, पास हो गया। 2014 में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में असिस्टेंट के लिए फार्म भरा, परीक्षा पास की। इसी साल उसने नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड की परीक्षा भी पास कर ली। 

2018 में उसने CRPF हेड कांस्टेबल, JSSC में पुलिस सब इंस्पेक्टर की परीक्षा भी पास कर ली। अभय तिवारी ने JSSC में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर, JPSC के ACF, FRO, FSO परीक्षाएं भी पास कर ली। 11वीं और 13वीं झारखंड सिविल सर्विस का प्री एग्जाम भी फर्स्ट अटैंप्ट में ही क्लीयर कर दिया।

अभय तिवारी किसी एग्जाम में फेल ही नहीं होता, इसीलिए झारखंड में हर किसी की जुबान पर इसी अभय तिवारी का नाम है। अभय तिवारी ने सरकारी नौकरियों के गोरखधंधे से करोड़ों की कमाई की। JPSC प्रीलिमिनरी पास कराने का रेट पांच लाख रुपये, मेन्स क्लीयर कराने का रेट 25 लाख रुपये रखा था। अभय तिवारी 10 लाख रुपये एडवांस लेता था।

साफ है कि झारखंड में सिर्फ़ पेपर लीक ही नहीं हुआ, बड़े पैमाने पर धांधलियां हुई, धोखा हुआ। परीक्षा कराने वाले माफिया ने छात्रों को इस कदर ठगा कि कोई उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीआडी जांच का आदेश देकर पीछा छुड़ाने की कोशिश की लेकिन प्रोटेस्ट करने वाले छात्र असलियत से वाकिफ हैं। उन्हें CID पर भरोसा नहीं है।

वैसे भी झारखंड में CID का रिकार्ड अच्छा नहीं है। इसलिए CBI को ये जांच सौंपने में कोई बुराई नहीं है।

झारखंड में जो छात्र धरने पर बैठे हैं, वो मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं, वो तो सिर्फ परीक्षाओं पर जल्द फैसला चाहते हैं। दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट जो दिल्ली में जंतर मंतर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे, वे रांची के प्रोटेस्ट से गायब हैं।

क्या झारखंड के छात्र समर्थन डिसर्व नहीं करते? या फिर दिल्ली में आवाज उठाने वाले दल हेमंत सोरेन के खिलाफ बोलना नहीं चाहते?

कांवड़िए खुद पर संयम रखें

उत्तर प्रदेश में इस वक्त कांवड़ यात्रा चल रही है। सरकार ने जबरदस्त इंतजाम किए हैं लेकिन कई जगह कांवड़ियों ने उत्पात मचाया, मारपीट की, हंगामा किया। मेरठ से लेकर हरिद्वार तक कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की गई। कांवड़ यात्रा के लिए कई जगह पर रूट बदले गए हैं, पुलिस तैनात है, लेकिन इसके बाद भी कई जगह से कांवड़ियों के हंगामे की खबरें आईं।

मेरठ में कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों को पीट दिया, उनकी वर्दी फाड़ दी, लेकिन मेरठ के एसपी सिटी का कहना है कि कोई पुलिसवाला घायल नहीं हुआ। दरअसल रात को दो कांवड़ियों की बाइक में  टक्कर हुई। पुलिस पहुंची, दो कांवड़ियों को पुलिस जीप में बैठा लिया लेकिन कांवड़ियों ने हंगामा शुरू कर दिया। अफवाह फैली कि पुलिस कांवड़ खंडित करने वालों को बचा रही है।

इसके बाद गुस्साए कांवड़ियों ने पुलिस जीप में बैठे कांवड़ियों को पीटना शुरू कर दिया, डंडों से उन्हें पीटा, कांवड़ियों की संख्या ज्यादा थी, पुलिस कुछ नहीं कर सकी। कुछ देर बाद कांवड़ियों का गुस्सा शांत हुआ। पुलिस ने घायलों का मेडिकल कराया।

क्या वजह है कि हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान बार बार झगड़े होते हैं, लाठी-डंडे चलते हैं, खून बहता है? ये कौन से संस्कार हैं? भोलेनाथ की आराधना यात्रा में गुस्से का, मारपीट का स्थान कैसे हो सकता है ? ज्यादातर कांवड़िए भजन गाते हुए मस्ती में गंगाजल लेकर जाते हैं, पर अगर दो चार जगह भी झगड़ा होता है तो पूरी कांवड़ यात्रा बदनाम होती है।

कांवड़ियों के लिए रूट, कॉरिडोर बनाए जाते हैं, विश्राम का, खाने-पीने का प्रबंध होता है। पुलिस उनकी हिफाजत करती है। जगह जगह लोग उनकी मदद के लिए खड़े रहते हैं। क्या ये अच्छा लगता है कि लोग कांवड़ियों पर फूल बरसाएं और कांवड़िए लाठी डंडे चलाएं? उन्हें संयम रखना चाहिए। शांति से अपनी यात्रा पूरी करनी चाहिए। भगवान शिव की सच्ची भक्ति का रूप तो यही होगा।

उदयनिधि स्टालिन का कमेंट महिला विरोधी, निंदनीय

तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के एक कमेंट को लेकर  इतना हंगामा हुआ कि पुलिस उदयनिधि को घर से पकड़ कर चेन्नई से तंजावुर ले गई। DMK के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर आ गए, पुलिस के साथ झड़पें हुईं। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, चार घंटे बाद पुलिस ने अदालत में कह दिया कि उदयनिधि का बयान दर्ज करने  के लिए हिरासत में लिया गया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें छोड़ दिया गया।

ये सब हंगामा इसलिए हुआ क्योंकि कावेरी जल विवाद के सवाल पर तंजावुर में रैली हो रही थी। इस रैली में उदयनिधि ने अपनी आदत के मुताबिक इशारों-इशारों में मशहूर एक्ट्रेस और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की महिला मित्र तृषा को लेकर विवादित कमेंट कर दिया।

बाद में उन्होंने बात संभालने की कोशिश की लेकिन जिस तरह डबल मीनिंग वाले कमेंट के बाद उदयनिधि स्टालिन और DMK वर्कर्स हंसे, उससे ये साफ अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वो तृषा के बारे में क्या कहना चाह रहे थे।

राजनीति में आने से पहले उदयनिधि खुद फिल्मों में काम करते थे, तृषा उनकी सहकर्मी रही हैं लेकिन राजनीति के चक्कर में नफरत इतनी बढ़ गई कि उदयनिधि ने विजय और तृषा को लेकर घटिया बात कह दी।

वैसे तो बयानबाजी के मामले में उदयनिधि आदतन शरारती हैं। तृषा को लेकर उन्होंने बड़ी चालाकी से डबल मीनिंग वाला डायलॉग मारा जिसकी निंदा की जानी चाहिए। अगर किसी महिला के बारे में इस तरह की अशोभनीय बात इशारों में भी कही जाए तो भी उसकी निंदा होनी चाहिए। लेकिन राजनीति की नजरों से देखेंगे तो मुख्यमंत्री विजय ने जिस तरह से एक्शन लिया, जिस तरह से उदयनिधि को गिरफ्तार करवाया, उससे उदयनिधि को फायदा होगा।

अब वो सड़क पर उतरकर सरकार से लड़ने वाले नेता बन गए हैं। अपनी हार के झटके से हताश पड़ी DMK में नई जान आ जाएगी। मुख्यमंत्री विजय को बाद में इसका नुकसान होगा। इस पूरे मामले में न कमेंट  की जरूरत थी, न अरेस्ट की।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 04 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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